राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या और पानी की मांग के कारण जल की कमी एक गंभीर समस्या बन गई है। गर्मियों में यह संकट और भी गहराता है। वर्तमान में सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) से निकले उपचारित पानी को नालों में बहाया जा रहा है, जबकि इसका उपयोग गैर-पेयजल कार्यों जैसे सिंचाई और निर्माण में किया जा सकता है। इस दिशा में दिल्ली सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत प्रत्येक घर में दो प्रकार के पानी की पाइपलाइन्स लगाई जाएंगी।
पार्कों और आवासीय क्षेत्रों में पौधों की सिंचाई के लिए एसटीपी के पानी की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में गैर-पेयजल कार्यों हेतु दोहरी पाइपलाइन प्रणाली लागू करने की योजना पर काम चल रहा है। वर्तमान में दिल्ली के 37 सीवेज उपचार संयंत्रों से प्रतिदिन लगभग 650 एमजीडी उपचारित पानी प्राप्त होता है, जिसमें से 105 एमजीडी का उपयोग पार्कों की सिंचाई और सड़कों पर छिड़काव के लिए किया जाता है। शेष पानी नालों में बहाया जाता है।
74 बड़े पार्कों में एसटीपी के पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का टेंडर जारी किया गया है, जिसके लिए 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। एसटीपी के उपचारित पानी की गुणवत्ता में सुधार करके इसे निर्माण कार्य और व्यावसायिक उपयोग में लाने की योजना है। इससे पेयजल की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
जल मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, कई सीवेज उपचार संयंत्रों का अपग्रेडेशन पूरा हो चुका है, जिससे उपचारित पानी का बीओडी 10 पर लाया गया है, जो निर्माण कार्यों के लिए उपयुक्त है। दोहरी पाइपलाइन प्रणाली के लिए व्यवहार्यता अध्ययन शीघ्र शुरू किया जाएगा। इस योजना को पहले सरकारी भवनों में लागू किया जाएगा, जिसके बाद इसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आवासीय परिसरों तक विस्तारित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों के तौर पर सिंगापुर 2030 तक 70% अपशिष्ट जल को पेयजल में बदलने की योजना बना रहा है, जबकि इजरायल लगभग 90% उपचारित पानी को कृषि में उपयोग करता है।















